Akhil Kshatriya Samaj

महामंत्री की कलम से

क्षत्रिय

शौर्य पराक्रम जिनका भूषण /
स्वाभिमान जिनकी छाया / /
उॅचे सिद्धांतो के लिए ही /
बलिबेदी जिनको भाया //

निज तन को खतरे में डाला /
न्योछावर प्राणो को किया //
धर्म और दुर्बल की रक्षा /
प्राणो से भी अधिक किया //

पतझड़ में पेड़ो सा जिसने /
दुःख में धीरज तन लिया //
क्षत्रिय है वही की जिसने /
हार नहीं स्वाबीकार किया //

सदा हिमालय की रक्षा में /
हर इच्छाओं का त्याग किया //
मातृ भूमि के लिए ही जिसने /
सीमा पर सिर चढ़ा दिया //

सदा चढ़े हम बलि वेदी /
बलि कुटिनीति अब नहीं चढ़ेंगे//
स्वाभिमान के लिए लड़े /
पर मोहरा बनना नहीं सहेगे //

युगो-युगो से जो क्षत्रिय था /
वही क्षत्रिय आज भी है //
जो रक्त दोडता था पुरखों में /
वह रक्त सुसिंचित आज भी है //

शिक्षा और सौर्य के बल अब /
ओछी हरकत नहीं सहेंगे//
सीमा पर यदि सिर देंगे हम /
दिल्ली पर भी राज करेंगे //
"जय हिन्द"